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शनिवार, 31 अक्टूबर 2026
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Crypto Market में बड़ा भूचाल! Binance पर साइबर हमला, 52 हजार करोड़ रुपये की क्रिप्टो संपत्ति प्रभावित

नई दिल्ली|Manuj
Crypto Market में बड़ा भूचाल! Binance पर साइबर हमला, 52 हजार करोड़ रुपये की क्रिप्टो संपत्ति प्रभावित

📸 सांकेतिक तस्वीर | फोटो: दैनिक सबसे तेज़

नई दिल्ली: क्रिप्टोकरेंसी बाजार से एक बड़ी खबर सामने आई है। दुनिया के प्रमुख क्रिप्टो एक्सचेंज Binance में साइबर सुरक्षा से जुड़ी बड़ी सेंधमारी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इस घटना में करीब 6.3 अरब डॉलर यानी लगभग 52 हजार करोड़ रुपये की डिजिटल संपत्ति प्रभावित होने का अनुमान है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म पर जमा और निकासी की सेवाओं को अस्थायी रूप से रोक दिया है।इस घटना के बाद क्रिप्टो मार्केट में भी अस्थिरता देखने को मिली है। Bitcoin समेत कई प्रमुख डिजिटल करेंसी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।सुरक्षा जांच के चलते Binance की सेवाओं पर रोकBinance ने साइबर हमले की जानकारी सामने आने के बाद अपने सिस्टम की सुरक्षा जांच शुरू कर दी है। कंपनी ने एहतियात के तौर पर Deposit और Withdrawal की सुविधा अस्थायी रूप से बंद की है। इससे यूजर्स फिलहाल अपने अकाउंट में नई क्रिप्टो जमा करने या मौजूदा डिजिटल संपत्ति निकालने में परेशानी का सामना कर सकते हैं।कंपनी की ओर से बताया गया है कि सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और प्रभावित सिस्टम को सुरक्षित बनाने का काम किया जा रहा है।करीब 3 अरब डॉलर की संपत्ति फ्रीज करने का दावाBinance के आधिकारिक अपडेट के अनुसार, प्रभावित डिजिटल संपत्तियों में से करीब 3 अरब डॉलर की संपत्ति को ब्लॉकचेन पार्टनर्स की सहायता से फ्रीज किया गया है। कंपनी ने नुकसान की भरपाई के लिए अपने SAFU फंड और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल करने की बात भी कही है।इस पूरे मामले में साइबर हमले के तरीके और जिम्मेदार लोगों की पहचान करने के लिए जांच जारी है।Bitcoin और दूसरी डिजिटल करेंसी पर असरBinance से जुड़ी इस खबर का असर क्रिप्टो निवेशकों के भरोसे पर भी पड़ा है। बाजार में Bitcoin, Ethereum और BNB जैसी डिजिटल करेंसी में गिरावट देखी गई। निवेशक फिलहाल बाजार की स्थिति और Binance की ओर से आने वाले नए अपडेट पर नजर बनाए हुए हैं।विशेषज्ञों के मुताबिक, बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज पर इस तरह की सुरक्षा घटना डिजिटल करेंसी बाजार में जोखिम को फिर से उजागर करती है।डिजिटल करेंसी में निवेश से पहले सावधानी जरूरीक्रिप्टोकरेंसी एक डिजिटल संपत्ति है, जिसका लेन-देन ब्लॉकचेन तकनीक के माध्यम से होता है। Bitcoin और Ethereum इसके लोकप्रिय उदाहरण हैं। इसमें निवेश के दौरान कीमतों में तेजी और गिरावट के साथ साइबर सुरक्षा का जोखिम भी बना रहता है।Binance की यह घटना एक बार फिर बताती है कि डिजिटल एसेट्स के मामले में मजबूत सुरक्षा व्यवस्था कितनी जरूरी है। अब सभी की नजर कंपनी की जांच रिपोर्ट और सेवाओं की बहाली पर है।

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1 नवंबर को दिल्ली में कांग्रेस की महारैली, रोहतक में BJP की पदयात्रा; तारीख बदलने पर उठे सवाल

नई दिल्ली|Manuj
1 नवंबर को दिल्ली में कांग्रेस की महारैली, रोहतक में BJP की पदयात्रा; तारीख बदलने पर उठे सवाल

रोहतक/नई दिल्ली: हरियाणा की राजनीति में 1 नवंबर को होने वाले दो बड़े आयोजनों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेस दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली आयोजित करेगी, जबकि BJP रोहतक में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा निकालेगी।कांग्रेस की महारैली में कथित वोट चोरी, मतदाता सूची में अनियमितताओं और चुनावी पारदर्शिता जैसे मुद्दे उठाए जाने की तैयारी है। हरियाणा कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता रैली में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जुटे हैं।वहीं, रोहतक में BJP की पदयात्रा में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की भागीदारी की संभावना जताई गई है।इस बीच, BJP की पदयात्रा की तारीख 31 अक्टूबर से बदलकर 1 नवंबर किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। हरियाणा कांग्रेस की सोशल मीडिया चेयरपर्सन मोनिका डुमरा ने तारीख में बदलाव को लेकर सवाल किया है। दोनों कार्यक्रम एक ही दिन होने से राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।हालांकि, तारीख बदलने के पीछे कांग्रेस की महारैली को कारण मानने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है। अब 1 नवंबर को होने वाले दोनों आयोजनों और उनमें नेताओं के संदेशों पर सबकी नजर रहेगी।

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रोजगार का सपना नहीं रहेगा अधूरा, अब DIGITAL ORRA करेगा पूरा

पंचकूला, हरियाणा|Vivek
रोजगार का सपना नहीं रहेगा अधूरा, अब DIGITAL ORRA करेगा पूरा

आधुनिकता के इस युग में एक ओर जहां बेरोजगारी और निजीकरण को लेकर लगातार चर्चाएं तेज हैं। वहीं अगर आप काबलियत और कुछ कर गुजरने की चाह रखते हैं तो आपको DIGITAL ORRA देगा नई पहचान। आज के दौर में जब पारंपरिक नौकरियों के अवसर सीमित हो रहे हैं और हर क्षेत्र में डिजिटल क्रांति आ चुकी है, तब खुद को समय के अनुसार ढालना सबसे बड़ी जरूरत बन गया है। केवल डिग्री होने से बात नहीं बनती, बल्कि हाथों में हुनर और आधुनिक डिजिटल स्किल्स होना सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। इसी उद्देश्य के साथ DIGITAL ORRA युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें डिजिटल युग का लीडर तैयार करने के लिए एक बेहतरीन मंच प्रदान कर रहा है।यह संस्थान आज के युवाओं की सबसे बड़ी जरूरत यानी व्यावहारिक ज्ञान पर काम करता है। यहां बच्चों को आज के समय के सबसे डिमांडिंग कोर्सेज सिखाए जाते हैं, जैसे डिजिटल मार्केटिंग, जिसके जरिए आप किसी भी बिजनेस को ऑनलाइन घर बैठे बुलंदियों पर पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा वीडियो एडिटिंग, जो आज की रील्स और यूट्यूब की दुनिया में सबसे ज्यादा मांग वाला और क्रिएटिव हुनर है, और ग्राफिक्स डिजाइनिंग, जिसके माध्यम से विजुअल क्रिएटिविटी के जरिए अपने विचारों को एक आकर्षक रूप दिया जाता है। इसके साथ ही, यहाँ विशेष तौर पर स्किल क्लासेस भी आयोजित की जाती हैं, जो युवाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाती हैं और उन्हें कॉर्पोरेट जगत या फ्रीलांसिंग के लिए पूरी तरह तैयार करती हैं। अगर आप भी अपनी किस्मत के भरोसे बैठने के बजाय अपनी काबिलियत के दम पर आगे बढ़ना चाहते हैं, तो यह सही समय है सही कदम उठाने का। आज ही जुड़ें और अपने सपनों को एक नई डिजिटल दिशा दें!

अंतर्राष्ट्रीय

ट्रंप का सपना चूर-चूर ! फिर नोबेल शांति पुरस्कार से दूर रहे ट्रंप

नई दिल्ली|Vivek
ट्रंप का सपना चूर-चूर ! फिर नोबेल शांति पुरस्कार से दूर रहे ट्रंप

वैश्विक स्तर पर शांति स्थापना, मानवीय अधिकारों की रक्षा और न्याय व्यवस्था को एक नई दिशा देने वाले प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize) की घोषणा कर दी गई है। साल 2026 का यह प्रतिष्ठित सम्मान भारतीय तमिल मूल की जानी-मानी मानवाधिकार कार्यकर्ता और पूर्व न्यायाधीश नवनेथम नावी पिल्लई (Navanethem Navi Pillay) को प्रदान किए जाने का आधिकारिक ऐलान किया गया है। नोबेल समिति की ओर से जारी घोषणा के अनुसार, पिल्लई को यह पुरस्कार पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय कानून को धार देने, मानवाधिकारों की रक्षा करने और अन्याय के खिलाफ अडिग रहने के उनके आजीवन संघर्ष के लिए दिया जा रहा है।ट्रंप को फिर हाथ लगी निराशाइस बार के नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर कूटनीतिक गलियारों में काफी चर्चाएं थीं। दुनिया भर के कई राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस बार यह पुरस्कार मिल सकता है, क्योंकि उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय समझौतों और संघर्षों को सुलझाने में अपनी भूमिका का दावा करते हुए इस सम्मान को पाने की इच्छा कई बार सार्वजनिक रूप से जाहिर की थी। हालांकि, नोबेल समिति ने राजनीतिक दांव-पेंच और कूटनीति के बजाय न्याय, कानून के शासन और पीड़ितों के अधिकारों के पक्ष में खड़े होने वाले व्यक्ति को चुनना बेहतर समझा, जिसके चलते ट्रंप को इस बार भी यह प्रतिष्ठित पुरस्कार हासिल नहीं हो सका।दक्षिण अफ्रीका से लेकर अंतरराष्ट्रीय अदालतों तक का सफरदक्षिण अफ्रीका में एक साधारण भारतीय तमिल मूल के परिवार में जन्मीं नावी पिल्लई का शुरुआती जीवन रंगभेद (Apartheid) की कुप्रथा और सामाजिक असमानता के बीच बीता। उन्होंने बेहद संघर्षपूर्ण परिस्थितियों में अपनी कानूनी शिक्षा पूरी की और दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद नीति के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठाई। उन्होंने उस काले दौर में नेल्सन मंडेला जैसे महान नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों के पक्ष में कई ऐतिहासिक कानूनी लड़ाइयां लड़ीं। अपनी असाधारण योग्यता के बल पर वे आगे चलकर दक्षिण अफ्रीका के उच्च न्यायालय (High Court) में जज बनने वाली पहली अश्वेत महिला बनीं। इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रवांडा क्रिमिनल ट्रिब्यूनल, इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) और संयुक्त राष्ट्र (UN) में मानवाधिकार उच्च आयुक्त जैसी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां बखूबी निभाईं। Nobel Prize Winner 2026 क्यों मिला नावी पिल्लई को यह ऐतिहासिक सम्मान?नोबेल समिति ने उनके चयन के पीछे कई बड़े और दूरगामी परिणामों वाले कारणों को रेखांकित किया है, जो इस प्रकार हैं:युद्ध अपराधों और नरसंहार के खिलाफ कानूनी शिकंजा: पिल्लई ने अपने पूरे कार्यकाल के दौरान यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि युद्ध अपराधों, मानवता के विरुद्ध किए गए अपराधों और नरसंहार के दोषियों को किसी भी कीमत पर कानूनी सजा मिले। उन्होंने न्याय प्रणाली को इतना मजबूत करने पर जोर दिया कि ताकतवर शासक भी कानून के दायरे से बाहर न जा सकें।रवांडा नरसंहार में ऐतिहासिक न्यायिक भूमिका: रवांडा के अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण (ICTR) में जज के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने ऐसे कड़े और दूरदर्शी फैसले दिए, जिन्होंने यौन हिंसा और बलात्कार को युद्ध के दौरान 'मानवता के खिलाफ अपराध' और नरसंहार के एक हथियार के रूप रूप में मान्यता दिलाने में मील का पत्थर साबित किया।घृणा और उकसावे के खिलाफ वैधानिक लड़ाई: उनके कार्यक्षेत्र का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि उन्होंने उन लोगों और प्रचार तंत्रों पर कानूनी कार्रवाई को बढ़ावा दिया जो मीडिया, भाषणों या अन्य माध्यमों से आम जनता को नरसंहार के लिए भड़काते या उकसाते हैं।कमजोर वर्गों और पीड़ितों को न्याय: उन्होंने अपने फैसलों और रिपोर्टों के माध्यम से हमेशा यह साबित किया कि जब तक पीड़ित पक्षों को आधिकारिक और निष्पक्ष न्याय नहीं मिलता, तब तक समाज में स्थाई शांति की कल्पना नहीं की जा सकती।'शांति' और 'न्याय' के बीच का गहरा तालमेलअक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि एक जज और मानवाधिकार वकील को शांति पुरस्कार से क्यों सम्मानित किया गया? इसका स्पष्ट उत्तर नोबेल समिति के उस दृष्टिकोण में छिपा है जिसके अनुसार, सच्ची और स्थाई शांति केवल हथियारों के बल पर या शक्तिशाली देशों के राजनीतिक समझौतों से कायम नहीं हो सकती। जब तक समाज में न्याय, जवाबदेही और कानून का डर नहीं होगा, तब तक हिंसा और युद्ध की विभीषिका समाप्त नहीं हो सकती। नावी पिल्लई ने अपने पूरे जीवन में इसी सिद्धांत को चरितार्थ किया है।ये भी पढ़ें- पेट्रोल 5 और डीजल 3 रुपए प्रति लीटर महंगा, जाने नए रेटवर्तमान समय में जब दुनिया के विभिन्न हिस्सों (जैसे गाजा और अन्य संघर्ष क्षेत्रों) में मानवाधिकारों के हनन और सैन्य कार्रवाइयों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं, ऐसे दौर में नावी पिल्लई को यह सम्मान मिलना यह संदेश देता है कि अंतरराष्ट्रीय कानून और न्याय की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। यह पुरस्कार केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं है, बल्कि यह उन तमाम लोगों की जीत है जो दुनिया के किसी भी कोने में अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं।

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कहां पकड़ा गया वायुसेना का फर्जी अधिकारी? वर्दी का किया गलत इस्तेमाल

हैदराबाद |Vivek
कहां पकड़ा गया वायुसेना का फर्जी अधिकारी? वर्दी का किया गलत इस्तेमाल

देश की सुरक्षा और सेना की गरिमा से खिलवाड़ करने वाले एक चौंकाने वाले मामले का खुलासा हुआ है। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में भारतीय वायुसेना (IAF) का फर्जी अधिकारी बनकर घूम रहे एक युवक को सैन्य सुरक्षा कर्मियों और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई के दौरान धर दबोचा। आरोपी न केवल सैन्य छावनी क्षेत्र में अवैध रूप से दाखिल हुआ था, बल्कि वह एयरफोर्स की वर्दी का दुरुपयोग कर सोशल मीडिया पर अपनी फर्जी धौंस जमाने और युवतियों को प्रभावित करने की साजिश रच रहा था। यह घटना शहर के संवेदनशील माने जाने वाले सिकंदराबाद स्थित परेड ग्राउंड में सामने आई, जिसके बाद से सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है।इस तरह हुआ फर्जीवाड़े का भंडाफोड़सिकंदराबाद के परेड ग्राउंड परिसर में सैन्य सुरक्षा कर्मियों की नजर एक युवक पर पड़ी जो भारतीय वायुसेना में 'फ्लाइंग ऑफिसर' की वर्दी पहनकर अत्यंत आत्मविश्वास के साथ घूम रहा था और मोबाइल से अपनी तस्वीरें खींच रहा था। ड्यूटी पर तैनात सतर्क सुरक्षाकर्मियों को उसकी चाल-ढाल, बॉडी लैंग्वेज और हरकतों पर कुछ संदेह हुआ। नियमों के तहत जब सैनिकों ने उसे रोककर उससे उसका परिचय पत्र और तैनाती स्थल के बारे में पूछताछ की, तो वह घबरा गया। उसके जवाबों में विरोधाभास देखकर सुरक्षाबलों का शक यकीन में बदल गया। कड़ाई से की गई शुरुआती पूछताछ में यह साफ हो गया कि वह व्यक्ति भारतीय वायुसेना का कोई आधिकारिक कर्मी नहीं है, बल्कि एक बहरूपिया है। इसके तुरंत बाद सैन्य सुरक्षा कर्मियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए उसे हिरासत में ले लिया और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए बेगमपेट पुलिस थाने के हवाले कर दिया।डिलीवरी एजेंट निकला आरोपी, बिहार का है मूल निवासीबेगमपेट पुलिस द्वारा की गई गहन पूछताछ में आरोपी की पहचान नीतेश कुमार पाल के रूप में हुई है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि नीतेश मूल रूप से बिहार का रहने वाला है और वर्तमान में हैदराबाद के ही नेरेडमेट इलाके में रह रहा था। चौंकाने वाली बात यह है कि उसका दूर-दूर तक सेना या किसी रक्षा सेवा से कोई लेना-देना नहीं है; बल्कि वह अपनी आजीविका चलाने के लिए पेशे से एक साधारण डिलीवरी एजेंट के रूप में काम करता है। पुलिस यह जानकर हैरान है कि एक साधारण डिलीवरी का काम करने वाला शख्स किस प्रकार इतनी आसानी से एयरफोर्स की आधिकारिक वर्दी और उसके प्रतीक चिह्न हासिल करने में कामयाब रहा। पुलिस अब उस लोकल टेलर या वेंडर की तलाश कर रही है जिसने उसे यह वर्दी सिलकर या उपलब्ध कराई थी, क्योंकि सेना की वर्दी का इस तरह अवैध रूप से बेचा जाना या बनवाया जाना गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय है। Fake Air Force Officer Hyderabad सोशल मीडिया पर रसूख और युवतियों को फंसाने का खेलपुलिस की साइबर विंग और जांच अधिकारियों द्वारा जब आरोपी के मोबाइल फोन और सोशल मीडिया खातों की खंगाली की गई, तो एक के बाद एक कई परतें उधड़ती चली गईं। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि नीतेश ने इंस्टाग्राम समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपनी प्रोफाइल को एक एयरफोर्स ऑफिसर के तौर पर पेश कर रखा था। उसने वर्दी पहने हुए कई तस्वीरें और रील्स अपलोड कर रखी थीं ताकि लोगों को उसकी असलियत पर कभी शक न हो।जांच एजेंसियों को इस बात का पुख्ता अंदेशा है कि वह इस फर्जी और मनगढ़ंत पहचान का इस्तेमाल सोशल मीडिया के जरिए युवतियों से दोस्ती करने, उन्हें अपने रुतबे के जाल में फंसाने और भावनात्मक रूप से गुमराह करने के लिए करता था। परेड ग्राउंड में विशेष तौर पर तस्वीरें खिंचवाने के पीछे उसका मुख्य उद्देश्य यही था कि वह उन तस्वीरों को अपनी प्रोफाइल पर अपलोड कर अपनी झूठी सैन्य पहचान को और अधिक मजबूत और विश्वसनीय दिखा सके। फिलहाल पुलिस इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि क्या उसने इस फर्जीवाड़े के जरिए पहले भी किसी को ठगा है या किसी युवती को अपने जाल में फंसाया है।ये भी पढ़ें- मैड संधू की हत्या मामले में एक्शन, एक शूटर गिरफ्तार, इस वजह से की थी हत्या ?पुलिस का शिकंजा और खंगाले जा रहे हैं नेटवर्कघटना की गंभीरता को देखते हुए बेगमपेट पुलिस ने आरोपी के खिलाफ विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इस बात की भी सुई घुमा रही है कि इस अपराध में अकेले नीतेश का हाथ है या उसके पीछे कोई और गिरोह भी सक्रिय है जो इस तरह की अवैध गतिविधियों में लिप्त है।सोशल मीडिया डाटा रिकवरी: आरोपी के इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य चैटिंग ऐप्स के चैट्स को खंगाला जा रहा है ताकि उसके संपर्कों और संभावित पीड़ितों की पहचान की जा सके।वर्दी का स्रोत: एयरफोर्स की हूबहू वर्दी और रैंक बैज उसे कहां से और किसने उपलब्ध कराए, पुलिस इस एंगल से भी सप्लायर की तलाश कर रही है।अन्य सहयोगियों की तलाश: क्या इस साजिश में कोई अन्य स्थानीय व्यक्ति उसकी मदद कर रहा था, इसकी भी तस्दीक की जा रही है।सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य इलाकों में इस प्रकार की सेंधमारी और वर्दी का दुरुपयोग देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। पुलिस इस मामले के हर एक पहलू को टटोल रही है और जांच के अंत में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर कोर्ट में चालान पेश कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

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5 करोड़ देकर कोहली को प्रेमानंद महाराज से मिलने बुलाया? वायरल खबर कितनी सच ?

मथुरा-वृंदावन|Vivek
5 करोड़ देकर कोहली को प्रेमानंद महाराज से मिलने बुलाया? वायरल खबर कितनी सच ?

प्रेमानंद महाराज जी के शिष्य की मौत के बाद से अलग-अलग तरह की खबरें सामने आ रही हैं. एक ओर जहां इस केस के बाद से दर्शन बंद करने का फैसला लिया गया है. वहीं पुलिस मौत की असली वजह तक पहुंचने का काम कर रही है. ऐसे में अब इस मामले से जुड़ा एक ओर विवाद खड़ा हो गया है. टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली को लेकर गावा किया गया कि विराट कोहली और अनुष्का शर्मा को 5 करोड़ देकर प्रेमानंद महाराज के आश्रम में बुलाया गया था. जिसको लेकर अनेक खबरें सामने आई और लोगों ने कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने रखी. दरअसल, फलाहारी महाराज दिनेश शर्मा की ओर से ये स्पष्ट शब्दों में ये दावा किया गया था और कहा गया था कि 5 करोड़ रुपए देकर विराट कोहली औऱ अनुष्का शर्मा को प्रेमानंद महाराज के आश्रम में बुलाया गया था. जिसके बाद देश में इस मुद्दे को लेकर विरोध छीड़ गया.मामले में विराट कोहली की तरफ से क्या कहा गयामामले ने तूल पकड़ा तो अब विराट कोहली के प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान जारी किया और सभी दावों को सिरे से खारिज किया. प्रवक्ता ने कहा कि फलाहारी महाराज दिनेश शर्मा की ओर से विराट कोहली को लेकर किए गए दावे पूरी तरह झूठे, निराधार और तथ्यात्मक रूप से गलत हैं. विराट कोहली की ओर से जारी इस बयान के बाद साफ है कि उनकी टीम इस मामले को लेकर किसी तरह की गलतफहमी या अटकल को आगे बढ़ते नहीं देखना चाहती. प्रवक्ता ने मीडिया से भी अपील की है कि किसी भी ऐसे बयान को प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले उसकी तथ्यात्मक जांच जरूर की जाए.विराट कोहली के प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान Kohli Spokesperson Statement 'हम स्पष्ट रूप से कहना चाहते हैं कि फलाहारी महाराज दिनेश शर्मा द्वारा श्री विराट कोहली के संबंध में किए गए दावे पूरी तरह झूठे, निराधार और तथ्यात्मक रूप से गलत हैं.' वहीं इस मामले में आश्रम से जुड़े एक शिष्य ने भी फलाहारी महाराज दिनेश शर्मा के दावे को बेबुनियाद बताया था. और अब विराट कोहली के प्रवक्ता ने भी फलाहारी महाराज दिनेश शर्मा के इस दावे को पूरी तरह झूठा, निराधार और तथ्यात्मक रूप से गलत करार दिया.आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विराट कोहली और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा कई मौकों पर प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंच चुके हैं. इन मुलाकातों की तस्वीरें और वीडियो भी सामने आते रहे हैं. दोनों ने कई बार प्रेमानंद महाराज जी से सवाल भी किए हैं. प्रवक्ता के मुताबिक, विराट कोहली प्रेमानंद महाराज जी के पास पूरी तरह अपनी गहरी आस्था और श्रद्धा के कारण जाते हैं.ये भी पढ़ें- प्रेमानंद महाराज के आश्रम में बदले नियम, अब दर्शन करने पर भी पड़ेगा असरसेलिब्रिटीज की आस्था और व्यक्तिगत जीवनविराट कोहली और अनुष्का शर्मा अपनी धार्मिक और आध्यात्मिक आस्था के लिए जाने जाते हैं। वे अक्सर देश के विभिन्न मंदिरों, आश्रमों और आध्यात्मिक गुरुओं के दर्शन करने जाते हैं। वृंदावन के लोकप्रिय संत प्रेमानंद महाराज जी के प्रति उनकी गहरी श्रद्धा जगजाहिर है। जब कोई सेलिब्रिटी अपनी मर्जी से किसी आध्यात्मिक गुरु से मिलने जाता है, तो उसे पैसों के लेन-देन या किसी सौदेबाजी से जोड़ना सरासर गलत और अनैतिक है। ऐसे बेबुनियाद आरोप न सिर्फ किसी की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक संस्थाओं की गरिमा पर भी सवाल खड़े करते हैं।वहीं संत प्रेमानंद महाराज के साधक रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की मौत के मामले में परिवार ने कई सवाल उठाए हैं। परिवार का कहना है कि दीपक आत्महत्या नहीं कर सकता था। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। बेटे की मौत की सूचना पर पहुंचीं रसिक की मां लौंग बाई ने कहा- दो साल पहले बेटे से आखिरी बार बात हुई थी। सूचना मिली कि बेटा गिर गया है। हम आनन-फानन में यहां आए। पहले भी मिलने आए थे, लेकिन मुलाकात नहीं होने दी गई थी। भगवान दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।

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जो महिला सवाल पूछे, उसे चुप करा दो- राहुल गांधी का वार

नई दिल्ली|Vivek
जो महिला सवाल पूछे, उसे चुप करा दो- राहुल गांधी का वार

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी इन दिनों बीजेपी को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं. अलग-अलग मुद्दों को लेकर वे सरकार पर हमलावर दिखाई दे रहे हैं. कभी अपने बयानों के जरिए तो कभी अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर पोस्ट के जरिए राहुल गांधी सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं, ऐसे में दिल्ली में प्रदर्शनकारियों और महिलाओं के साथ कथित पुलिस की कार्रवाई को लेकर उन्होंने दिल्ली पुलिस और गृह मंत्री अमित शाह पर बड़ा जुबानी हमला बोला है साथ ही कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं.राहुल गांधी ने आरोप लगाते हुए कहा कि दिल्ली में इस समय एक ही पैटर्न दिखाई दे रहा है कि जो भी महिला सवाल पूछती है, उसे चुप कराने का प्रयास किया जाता है. उन्होंने सरकार पर तानाशाही रवैया अपनाने और लोकतंत्र की आवाज को दबाने के भी गंभीर आरोप लगाए हैं.जंतर-मंतर की घटना और महिला पत्रकारों से बदसलूकी के आरोपहाल ही में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन और वहां की गई पुलिस कार्रवाई का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने बताया कि उस दौरान सैकड़ों की संख्या में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था. उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रदर्शन में शामिल महिला प्रदर्शनकारियों ने पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा उनके साथ बदसलूकी किए जाने के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं.यही नहीं, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कवरेज करने गईं महिला पत्रकारों के कैमरे छीने जाने और उन्हें पुलिस द्वारा घसीटे जाने जैसी शर्मनाक घटनाएं भी सामने आई हैं. राहुल गांधी ने नाराजगी जताते हुए यह भी कहा कि एक पीड़ित महिला पत्रकार द्वारा लिखित शिकायत दिए जाने के बावजूद पुलिस ने संबंधित मामले में एफआईआर (FIR) तक दर्ज करने की जहमत नहीं उठाई, जो कानून व्यवस्था की पोल खोलती है Rahul Gandhi Tweet साकेत थाने का विवाद और महिला सुरक्षा पर बड़े सवालराहुल गांधी ने अपने बयान में दिल्ली के Saket Police Station से जुड़े एक अन्य मामले का भी प्रमुखता से जिक्र किया. उन्होंने बेहद गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस थाने के अंदर महिलाएं अपनी सुरक्षा और न्याय की गुहार लगाने जाती हैं, अगर उसी थाने के भीतर उनके साथ इस तरह का अवांछित व्यवहार और उत्पीड़न के आरोप लगने लगें, तो यह स्थिति देश की राजधानी के लिए बेहद चिंताजनक और गंभीर है.उन्होंने सीधे तौर पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन पुलिसकर्मियों और प्रशासनिक तंत्र पर देश की आधी आबादी यानी महिलाओं की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी है, वे ही आज महिलाओं के लिए असुरक्षा का कारण बनते जा रहे हैं.गृह मंत्री अमित शाह से सीधा सवाल और सीसीटीवी फुटेज की मांगचूंकि दिल्ली पुलिस सीधे तौर पर केंद्र सरकार के केंद्रीय गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन आती है, इसलिए राहुल गांधी ने सीधे तौर पर गृह मंत्री अमित शाह को कटघरे में खड़ा किया. इस पूरे प्रकरण की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस नेता ने पुरजोर मांग की कि साकेत थाने का पूरा CCTV Footage तुरंत सार्वजनिक किया जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके. उन्होंने मांग की कि जो भी पुलिसकर्मी इस पूरी घटना में दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ बिना किसी देरी के सख्त से सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए. ये भी पढ़ें- ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने से सुप्रीम कोर्ट ने किया मना, कही ये बड़ी बातअपनी बात के अंत में राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह से सीधा और तीखा सवाल पूछते हुए कहा, "अमित शाह जी- आप और आपकी पुलिस महिलाओं से आखिर क्यों डरती है?" यह पूरा बयान देश की राजधानी में महिला सुरक्षा और पुलिस प्रशासन की जवाबदेही को लेकर एक बड़ी राजनीतिक बहस छेड़ चुका है.

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ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने से सुप्रीम कोर्ट ने किया मना, कही ये बड़ी बात

नई दिल्ली|Vivek
ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने से सुप्रीम कोर्ट ने किया मना, कही ये बड़ी बात

इन दिनों मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार विवादों से घिरे हुए हैं. कई राजनीतिक दलों ने उनकी कार्यशैली पर सवाल खड़ा किए हैं. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने के लिए कोई अंतरिम आदेश जारी करने से मना कर दिया है. दरअसल, मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप है कि उन्होंने भारत के चुनाव आयोग में बाकी दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना ही एकतरफा फैसले लिए हैं. इस मामले में CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने आरोपों पर भारत के चुनाव आयोग से जवाब तलब किया है.सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बातअदालत ने अपने सख्त संकेतों में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि आयोग का जवाब सामने आने के बाद यह साबित होता है कि CEC द्वारा लिए गए फैसले बिना किसी ज़रूरी आम सहमति या बहुमत के लिए गए थे, तो शीर्ष अदालत उन फैसलों की समीक्षा कर सकती है और उन्हें वापस लेने या पलटने का कड़ा कदम भी उठा सकती है।सामूहिक निर्णय लेने की व्यवस्था और संविधान का अनुच्छेद 324इस संबंध में दाखिल की गई जनहित याचिका में यह प्रमुख मांग की गई थी कि निर्वाचन आयोग के आंतरिक कामकाज में सामूहिक निर्णय की प्रक्रिया को (Collective Decision-Making Process) को पूरी सख्ती के साथ लागू किया जाए। इसके साथ ही याचिका में 'क्वो वारंटो' (Quo Warranto) रिट जारी करने का भी अनुरोध किया गया था, ताकि यह कानूनी रूप से स्पष्ट किया जा सके कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने किस संवैधानिक अधिकार के तहत कथित तौर पर अकेले ही आयोग के नाम पर इतने बड़े फैसले ले लिए।याचिकाकर्ताओं ने अपने तर्कों के समर्थन में संविधान के अनुच्छेद 324 (Article 324 of the Indian Constitution) का हवाला देते हुए यह दलील दी कि देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की देखरेख, निर्देशन और नियंत्रण का विशेष अधिकार किसी एक अकेले मुख्य चुनाव आयुक्त का नहीं, बल्कि पूरे चुनाव आयोग (निकाय) का होता है। इसके अलावा, मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम 2023 (Chief Election Commissioner and other Election Commissioners Act, 2023) की धारा 18 का भी विशेष तौर पर जिक्र किया गया, जिसमें स्पष्ट रूप से सामूहिक निर्णय लेने और मतभेद की स्थिति में बहुमत से फैसले लेने का वैधानिक प्रावधान तय किया गया है।न्यूज़ रिपोर्ट्स और फाइल नोटिंग्स पर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक टिप्पणीइस हाई-प्रोफाइल कानूनी लड़ाई के दौरान याचिका में अन्य चुनाव आयुक्तों (जैसे सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी से जुड़ी समकालीन लिखित रिपोर्ट्स व फाइल नोटिंग्स) का हवाला दिया गया था। इन नोटिंग्स में अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच ECI के फैसलों पर कम से कम 14 कड़ी आपत्तियां दर्ज किए जाने का दावा किया गया था।ये भी पढ़ें- ज्ञानेश कुमार पर पीएम मोदी ने दबाव डाला- खरगेहालांकि, Supreme Court ने बहुत स्पष्ट शब्दों में यह दो टूक टिप्पणी की कि अदालतें केवल मीडिया रिपोर्ट्स या अखबारों की खबरों के आधार पर इतने बड़े और दूरगामी परिणाम वाले संवैधानिक फैसले नहीं दे सकतीं। अदालत ने कानूनी साक्ष्यों और आधिकारिक दस्तावेजों को प्राथमिकता देने की बात कही है, जिससे यह साफ हो गया है कि इस मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही पूरी तरह से तथ्यों और आयोग के औपचारिक जवाब पर ही टिकी होगी।

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किसानों की बल्ले-बल्ले, इन फसलों पर बढ़ी MSP

नई दिल्ली|Vivek
किसानों की बल्ले-बल्ले, इन फसलों पर बढ़ी MSP

नई दिल्ली में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की एक अहम बैठक में देश के विकास, कृषि क्षेत्र को मजबूती देने और शहरी बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में कई ऐतिहासिक और दूरगामी निर्णय लिए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस कैबिनेट बैठक में मुख्य रूप से किसानों की आय बढ़ाने, देश की राजधानी में ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा को बढ़ावा देने के उपायों पर मुहर लगाई गई है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस को इन सभी फैसलों की विस्तृत जानकारी दी, जो आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता के जीवन पर गहरा प्रभाव डालेंगे।रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बंपर इजाफासरकार ने कृषि क्षेत्र को संबल प्रदान करते हुए फसल वर्ष 2027-28 के लिए रबी की सभी प्रमुख फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है। इस फैसले से देश के करोड़ों अन्नदाताओं को उनकी मेहनत का बेहतर और लाभकारी मूल्य मिल सकेगा। सरकार द्वारा तय किए गए नए एमएसपी आंकड़ों के मुताबिक, गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। वहीं, किसानों की पसंद बनने वाले चने का एमएसपी 5,928 रुपये प्रति क्विंटल और जौ का समर्थन मूल्य 2,286 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।इसके अलावा, दलहन और तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मसूर का एमएसपी 7,390 रुपये, सरसों का 6,613 रुपये और कुसुम (सफ्लॉवर) का समर्थन मूल्य 7,215 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। यदि वृद्धि की बात करें तो इस बार सबसे ज्यादा फायदा कुसुम की खेती करने वाले किसानों को मिला है, जिसके दाम में सीधे तौर पर 675 रुपये प्रति क्विंटल की बंपर बढ़ोतरी की गई है। इसके साथ ही रेपसीड और सरसों के भाव में 413 रुपये, मसूर में 390 रुपये, जौ में 136 रुपये, चना में 83 रुपये और गेहूं के समर्थन मूल्य में 25 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है।फसल विविधीकरण और किसानों को मिलने वाला मार्जिनकेंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि अखिल भारतीय औसत उत्पादन लागत के मुकाबले किसानों को मिलने वाला अनुमानित मार्जिन काफी संतोषजनक है। गेहूं के मामले में यह मार्जिन 106 फीसदी, रेपसीड और सरसों के लिए 96 फीसदी, मसूर के लिए 92 फीसदी, चना के लिए 59 फीसदी, जौ के लिए 58 फीसदी और कुसुम के लिए 50 फीसदी तक पहुंचता है। सरकार का मुख्य उद्देश्य इस मूल्य वृद्धि के जरिए पारंपरिक गेहूं-धान के दायरे से बाहर निकलकर फसल विविधीकरण (Crop Diversification) को प्रोत्साहित करना है, ताकि दालों और तिलहन के उत्पादन में देश को पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनाया जा सके। MSP Hike 2027 आंकड़ों पर गौर करें तो साल 2014-15 से 2025-26 के बीच गेहूं की कुल सरकारी खरीद बढ़कर 3,715 लाख मीट्रिक टन (LMT) तक पहुंच गई है, जबकि इसके पिछले दशक यानी 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह आंकड़ा महज 2,254 लाख मीट्रिक टन था। इसी तरह रबी की छह प्रमुख फसलों की कुल खरीद पिछले वर्षों के 2,302 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर अब 3,921 लाख मीट्रिक टन हो गई है। इसके अलावा, गेहूं उत्पादक किसानों को वितरित की गई एमएसपी की कुल राशि भी 2.56 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 7.31 लाख करोड़ रुपये के ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है।दिल्ली की ट्रैफिक व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव: आईटीएमएसकेंद्र सरकार ने सिर्फ किसानों का ही नहीं, बल्कि देश की राजधानी दिल्ली के आम नागरिकों की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक यानी ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने के लिए भी एक बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली में यातायात को पूरी तरह से सुगम और स्मार्ट बनाने के वास्ते 'इंटेलीजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम' (ITMS) प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी गई है। वर्तमान स्थिति यह है कि शहर के लगभग 1,529 ट्रैफिक सिग्नल पुराने और मैनुअल तरीकों से संचालित होते हैं, जिसके कारण वाहनों का दबाव बढ़ने पर जाम की स्थिति बन जाती है।इस नई तकनीक के आने के बाद ये सारे सिग्नल पूरी तरह स्वचालित हो जाएंगे और सड़क पर मौजूद गाड़ियों की वास्तविक संख्या व दबाव के आधार पर अपने समय (टाइमिंग) को स्वतः समायोजित (एडजस्ट) कर लेंगे। इस आधुनिक प्रोजेक्ट को कुल तीन अलग-अलग चरणों में चरणबद्ध तरीके से शहर के विभिन्न प्रमुख कॉरिडोर्स पर लागू किया जाएगा। इस पूरी परियोजना पर सरकार लगभग 1,790 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश करेगी, जिससे दिल्ली के लाखों वाहन चालकों को ट्रैफिक की झंझटों से बड़ी राहत मिलने की पूरी उम्मीद है।ये भी पढ़ें- पंजाब 31 दिसंबर 2029 से पहले होगा चिट्टा मुक्त- अमित शाहग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-3 को मिली मंजूरीपर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण से निपटने की दिशा में एक और बड़ा निर्णय लेते हुए कैबिनेट ने 'ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज III' योजना को भी अपनी हरी झंडी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी योजना पर कुल 1.86 लाख करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इसका मुख्य उद्देश्य बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के साथ नवीकरणीय और हरित ऊर्जा (Renewable Energy) को देश के दूर-दराज के कोनों तक सुगमता से पहुंचाना है। कुल मिलाकर, मोदी कैबिनेट के ये सभी फैसले देश की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ शहरी बुनियादी ढांचे और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को साधने में मील का पत्थर साबित होंगे।

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पंजाब 31 दिसंबर 2029 से पहले होगा चिट्टा मुक्त- अमित शाह

जालंधर, पंजाब|Vivek
पंजाब 31 दिसंबर 2029 से पहले होगा चिट्टा मुक्त- अमित शाह

पंजाब की राजनीतिक सरगर्मी इन दिनों अपने चरम पर है। जैसे-जैसे चुनाव का समय नजदीक आ रहा है, सभी राजनीतिक दल अपनी जमीन मजबूत करने और एक-दूसरे को मात देने के लिए मैदान में उतर चुके हैं। इस बार के चुनावी रण में कई बड़े मुद्दे अपनी जगह बना रहे हैं, लेकिन इन सबके बीच 'नशा' और खासकर 'चिट्टा' का मुद्दा सबसे ऊपर छाया हुआ है। इसी चुनावी माहौल के बीच देश के गृह मंत्री अमित शाह ने जालंधर की ऐतिहासिक धरती से एक बेहद अहम और बड़ा बयान दिया है, जिसने पंजाब की सियासत में हलचल तेज कर दी है। उन्होंने मौजूदा आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर तीखा हमला बोलने के साथ-साथ राज्य की जनता के सामने एक स्पष्ट और कड़ा रोडमैप भी रखा है।जालंधर की धरती से हुंकार और पंजाब का गौरवशाली इतिहासअपने संबोधन की शुरुआत करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि ऐतिहासिक नगरी जालंधर आना उनके लिए हमेशा से सौभाग्य की बात रही है, लेकिन इस बार एक नशा मुक्त पंजाब के पवित्र संकल्प के साथ यहां आना उनके लिए परम सौभाग्य का विषय है। उन्होंने पंजाब के गौरवशाली अतीत को याद करते हुए कहा कि पूरा हिंदुस्तान इस वीर भूमि को मुख्य रूप से दो महान और ऐतिहासिक कारणों से जानता है और हमेशा से इसका ऋणी रहेगापहला कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि जब-जब देश को अन्न के संकट से जूझना पड़ा या खाद्यान्न की भारी जरूरत महसूस हुई, तब-तब पंजाब के मेहनतकश और अन्नदाता किसानों ने अपने खून-पसीने से देश के अन्न भंडार को लबालब भर दिया। आज भी देश की खाद्य सुरक्षा में पंजाब के किसान अपनी पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ इस बड़ी जिम्मेदारी को निभा रहे हैं Amit Shah Punjab Speech देश की रक्षा में पंजाब का अतुलनीय बलिदानअपने संबोधन के दूसरे बिंदु में अमित शाह ने पंजाब के शौर्य और पराक्रम को नमन किया। उन्होंने कहा कि चाहे देश की आजादी से पहले का स्वतंत्रता संग्राम हो या आजादी के बाद का दौर, जब भी देश की सुरक्षा, संप्रभुता और रक्षा की बात आई, तो पंजाब का जवान और आम नागरिक हमेशा सबसे आगे खड़ा नजर आया। पंजाबियों की अद्वितीय बहादुरी और महान बलिदानों के दम पर ही हमें अंग्रेजों की गुलामी से आजादी मिली थी। आज भी देश की सरहदों की रक्षा करने और आतंकवाद का मुकाबला करने में पंजाब के जवानों ने सबसे ज्यादा कुर्बानियां दी हैं, जिन पर पूरे देश को गर्व हैपिछली सरकारों पर साधा निशानाअमित शाह ने पंजाब की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए एक कड़वा सच सामने रखा। उन्होंने सवाल उठाया कि आज देश के इस आन-बान-शान वाले राज्य को 'नशा मुक्त पंजाब' अभियान की इतनी अधिक जरूरत क्यों आन पड़ी है? इसके पीछे की सबसे बड़ी और दर्दनाक वजह यह है कि पिछली सरकारों के कार्यकाल के दौरान यहां 'चिट्टा' जैसे अत्यंत खतरनाक और अवैध सिंथेटिक नशे के व्यापार को खुलेआम फलने-फूलने दिया गया। इन सियासी संरक्षणों ने पंजाब की युवा पीढ़ी को भीतर से खोखला कर दिया और कई हंसते-खेलते परिवारों को बर्बाद कर दिया।उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब केंद्र और भारतीय जनता पार्टी (BJP) मिलकर इस काले कारोबार का पूरी तरह से नाश करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। पिछली सरकारों की उदासीनता और मिलीभगत के कारण ही आज यह नासूर पंजाब के युवाओं के गले की फांस बन गया है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।बीजेपी का मुख्य एजेंडा: सिर्फ और सिर्फ 'नशा मुक्ति'पंजाब के चुनावी समीकरणों पर बात करते हुए गृह मंत्री ने ऐलान किया कि इस बार के विधानसभा चुनाव में कई मुद्दे चर्चा में हैं—जैसे किसानों के अधिकार, औद्योगिक विकास, कानून-व्यवस्था की स्थिति और महिला सुरक्षा। ये सभी मुद्दे अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन बीजेपी इस चुनाव को केवल और केवल एक ही सबसे बड़े और अहम मुद्दे पर लड़ने वाली है, और वह है 'नशा मुक्त पंजाब'।अमित शाह ने मंच से पंजाब की माताओं, बहनों और खास तौर पर यहां के ऊर्जावान युवाओं को संबोधित करते हुए एक बड़ा वादा किया। उन्होंने कहा कि आप आने वाले चुनाव में बीजेपी का समर्थन कीजिए और कमल के निशान पर अपना वोट दीजिए। उन्होंने कड़ा संकल्प लेते हुए घोषणा की कि 31 दिसंबर 2029 से पहले-पहले उनकी सरकार पंजाब को 'चिट्टे' और हर प्रकार के अवैध नशे के व्यापार से पूरी तरह से मुक्त कर देगी।ये भी पढ़ें- ज्ञानेश कुमार पर पीएम मोदी ने दबाव डाला- खरगेइस प्रकार, गृह मंत्री अमित शाह के इस बयान ने आगामी पंजाब चुनावों की पूरी दिशा और दशा तय कर दी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता इस बड़े संकल्प और राजनीतिक वादे पर किस प्रकार अपनी मुहर लगाती है।

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ज्ञानेश कुमार पर पीएम मोदी ने दबाव डाला- खरगे

नई दिल्ली|Vivek
ज्ञानेश कुमार पर पीएम मोदी ने दबाव डाला- खरगे

कांग्रेस की ओर से इन दिनों हर राज्य में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और बीजेपी को लेकर विरोध प्रदर्शन करती हुई नजर आ रही है. राहुल गांधी के साथ-साथ कांग्रेस के वरिष्ट नेताओं को सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करते हुए देखा गया है. दरअसल, कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर बीजेपी को फायदा पहुंचाने का आरोप लगा रही है. जिसको लेकर ही कांग्रेस के नेता प्रदर्शन कर सरकार और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को घेरने का काम कर रहे हैं. इसी कड़ी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि पीएम मोदी ने ज्ञानेश कुमार पर दबाव डाला था. इसलिए नैतिकता के आधार पर नरेंद्र मोदी को इस्तीफा देना चाहिए. इसके साथ उन्होंने ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने की मांग भी की.जनता के अधिकार को लेकर कांग्रेस की लड़ाई- खरगेकांग्रेस कार्य समिति की बैठक को संबोधित करते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि कांग्रेस की लड़ाई किसी एक दल, संस्था या किसी एक व्यक्ति के साथ नहीं है बल्कि कांग्रेस मतदाताओं के अधिकार, संविधान की रक्षा के लिए लड़ रही है. उन्होंने कहा, 'निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता लोकतंत्र की सुरक्षा की पहली शर्तों में से एक है।कांग्रेस अध्यक्ष के सवालकांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सवाल किया कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का फैसला किसने लिया और दो चुनाव आयुक्तों को 'इंटरनल पोर्टल' से बाहर क्यों रखा गया? खरगे ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और निर्वाचन आयुक्तों के बीच भी मतभेद सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में संबंधित CEC को पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस्तीफे की मांगकांग्रेस अध्यक्ष ने पीएम मोदी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पीएम मोदी ने दबाव बनाया था जिसके कारण ही अब नैतिकता के आधार पर पीएम मोदी को इस्तीफा दे देना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों से लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं. Congress Protest Against EC चुनाव आयोग को कांग्रेस की नसीहतमल्लिकार्जुन खरगे ने कांग्रेस को कामों का बखान किया और कहा कि कांग्रेस ने देश में ऐसी संस्थाओं के निर्माण और उन्हें स्वतंत्र एवं अधिकार-संपन्न बनाने की भूमिका निभाई है, लेकिन आज हालात कुछ ओर हैं. उन्होंने कहा कि हम तो चाहते हैं कि चुनाव आयोग इतना मजबूत और विश्वसनीय हो कि सत्तापक्ष और विपक्ष, दोनों उसके निर्णयों पर समान भरोसा करें।'कांग्रेस की 5 प्रमुख मांगेंमतदाता सूची में जो बदलाव हुए हैं उनका डेटा सार्वजनिक किया जाएजिन वोटर्स के नाम हटे हैं उन्हें इसकी सूचना मिले और अपील करने का मौका मिलेराजनीतिक दलों को मतदाता सूची का डेटा समय पर मिलेगंभीर विसंगतियों के मामलों में स्वतंत्र और समयबद्ध जांच सुनिश्चित होचुनाव प्रक्रिया से जुड़े फैसलों में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित होये भी पढ़ें- गिरगिट की तरह रंग बदलने वालों से सावधान- सीएम योगीआगे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि देश के मतदाताओं को यह भरोसा होना चाहिए कि उनका वोट सुरक्षित है। उन्होंने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा मतदाता सूचियों से जुड़े मुद्दे उठाए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने कर्नाटक तथा हरियाणा और महाराष्ट्र में मतदाता आंकड़ों को लेकर सवाल उठाए थे। खरगे ने दावा किया कि राहुल गांधी ने 'डुप्लीकेट' मतदाताओं, संदिग्ध पतों, एक ही पते पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम और फॉर्म-6 से जुड़ी प्रविष्टियों को लेकर दस्तावेजों के आधार पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से इन मुद्दों को लेकर ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर किए गए प्रदर्शनों का भी उल्लेख किया।आगामी चुनावों को लेकर कांग्रेस की रणनीतिइसके साथ ही कांग्रेस ने आगामी चुनावों को लेकर कमर कस ली है. मल्लिकार्जुन खरगे ने इसको लेकर कहा कि कांग्रेस इस बात को लेकर काम करेगी कि किसी भी मतदाता का अधिकार उससे ना छीना जाए और हर व्यक्ति का वोट सुरक्षित रहे,संसद से सड़क तक लड़ेगी कांग्रेस- खरगेकांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए सड़क से संसद तक अपनी लड़ाई जारी रखेगी। इसको लेकर कांग्रेस का हर कार्यकर्ता पूरी मेहनत के साथ काम करेगा ताकि देश का लोकतंत्र जिंदा रहे. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले ही जनता के हितों के लिए काम करती रही है और आगे भी कांग्रेस जनहित से जुड़े हर मुद्दे को लेकर तत्परता से काम करेगी.

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